परम श्रद्धेय आचार्य प्रवर 1008 श्री हस्तीमल जी म.सा़. की पावन प्रेरणा से 16 नवम्बर 1973 को संस्थान की स्थापना की गई। आचार्य हस्ती आध्यात्मिक शिक्षण संस्थान (सिद्धान्त शाला) संघ-समाज के प्रतिभावान एंव उच्च अध्ययन की चाह रखने वाले विद्यार्थियों के लिए संचालित एक संस्था है कोई भी प्रतिभावान बालक उच्च अध्ययन की चाह रखने वाला हो तथा संसाधनों के अभाव में कहीं पीछे ना रह जाय, इस हेतु ऐसे विद्यार्थियों को प्रवेश देना व सुसंस्कारों के साथ उच्च अध्ययन की सुविधा प्रदान करने हेतु यह संस्थान संचालित है। संघ-समाज के छात्रों का सर्वांगीण विकास करना ही संस्थान का प्रमुख ध्येय है। संस्थान का संचालन गजेन्द्र चेरिटेबल ट्रस्ट द्धारा किया जा रहा है।

इस संस्थान में कक्षा नवमी से विद्यार्थियों को  प्रवेश दिया जाता है। विध्यालय,महाविध्यालय में अध्ययन करने के साथ-साथ विद्यार्थी प्रोफेशनल एवं राजकीय प्रतियोगी परीक्षा सेवाओं की तैयारी भी करते है।

संस्थान में प्रवेश प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को धार्मिक एवं आध्यात्मिक अध्ययन भी करवाया जाता है जिससे कि वे धार्मिक शिविरों ,पूज्य चारित्रात्माओं,विरक्त भाई-बहनों के अध्ययन-अध्यापन में सहयोगी बन सके व जैन धर्म व दर्शन के जानकार बन सके। यहां अध्ययनरत विध्यार्थियों द्धारा पर्यूषण पर्व पर स्वाध्यायी के रूप में सेवाएं प्रदान की जाती है। पूज्य चारित्रात्माओं की सेवा-सन्निधि का लाभ भी समय-समय पर लेते है।

प्रतिदिन प्रातः सामायिक के साथ छात्रों के दिनचर्या की शुरूआत होती है। वक्तृत्व एवं लेखन कला का विकास हो इस हेतु भी कई कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। महीने में एक विशिष्ठ व्यक्तित्व द्धारा किसी विषय पर  सेमिनार,भाषण अथवा संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।

विद्यार्थियों के लिए संस्थान में अध्ययनानुकूल आवास-निवास के साथ भोजन की समुचित व्यवस्था है।

कम्प्यूटर,इंटरनेट,इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स के साथ लाइब्रेरी एवं खेल सामग्री जैसी सुविधाएं भी संस्थान के विद्यार्थियों को प्रदान की जाती है।

प्रतिवर्ष संस्थान द्धारा निर्धारित प्रतिभावान विद्यार्थियों को विभिन्न श्रेणीयों में पुरस्कार प्रदान किये जाते है।

अब तक इस संस्थान से सैकड़ो विध्यार्थी अध्ययन प्राप्त कर चुके है। वे वर्तमान में उच्च प्रशासनिक,राजकीय एवं व्यावसायिक सेवाकार्यों से जुड़े हुए है , संघ-समाज से प्रत्याक्षाप्रत्यक्ष रूप में जुड़कर सेवा कर रहे है।

विद्यार्थियों के लिए संस्थान में पालने योग्य नियम :-

1. प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व प्रतिदिन सामूहिक सामायिक व सांय को प्रार्थना में शामिल होना अनिवार्य है।
2. अष्टमी, चतुर्दशी व पक्खी, पर्युषण पर्व के दिवसों पर प्रतिक्रमण करना अनिवार्य होगा तथा तिविहार- चौविहार अनिवार्य होगा।
3. किसी भी अनावश्यक कार्य हेतु संस्थान से बाहर नहीं जाने दिया जायेगा। संस्थान के बाहर ट्यूशन व क्लासेज अटैंड करने के लिये प्राचार्य से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
4. व्यवहारिक शिक्षण के साथ- साथ धार्मिक पाठ्यक्रम पर भी पूर्ण ध्यान केन्द्रित करना होगा एवं संस्थान पाठ्यक्रम की परीक्षा में भी न्यूनतम 70 प्रतिशत मार्क्स लाने होंगे। वहीं शैक्षणिक अध्ययन में भी न्यूनतम 70 प्रतिशत मार्क्स लाने होंगे। संस्थान के नियमानुसार दैनिक कार्यक्रम करने होंगे।
5. संस्थान में पढ़ते हुए कम से कम पाँच वर्षों के दौरान रात्रि-भोजन व जमीकन्द का त्याग रहेगा। बाजार से कोई वस्तु लाकर उपयोग मे लेने से पूर्व अनुमति अनिवार्य है नियम तोड़ने के हालात में परिस्थिति के अनुसार कार्यवाही की जा सकती है।
6. विद्यार्थी अपने साथ रेडियो, लेपटाप, टी.वी. या मोबाइल कुछ भी न लावें, क्योंकि इनका निषेध है। समयानुकूल कुछ व्यवस्था की जा सकती है। विशेष  परिस्थितियों में केवल साधारण मोबाईल की छूट दी जा सकती है।
7. संस्थान से बाहर आने जाने का समय, कारण व स्थान प्राचार्य से आज्ञा लेने के बाद संस्थान के रजिस्टर में नोट करना होगा।
8. संस्थान द्धारा घोषित अवकाशों के अतिरिक्त अन्य अवकाश परिस्थिति के अनुसार ही देय होगा। अवकाश हेतु पूर्व में प्रार्थना पत्र तथा परिजन से बात होने पर ही विचार किया जावेगा।
9. घर से आने तथा जाने पर लाये हुए सामान की जानकारी कार्यालय में देनी होगी तथा अपना सारा सामान चैक कराना होगा।
10. संस्थान द्धारा उपयोग हेतु दी जाने वाली कोई भी वस्तु बिना अनुमति के घर पर न ले जावें।
11. पर्युषण पर्व में स्वाध्यायी बनकर बाहर सेवा देना अनिवार्य तथा शिविरों में परिस्थिति के अनुसार सेवा देना अनिवार्य होगा ।
12. धार्मिक कार्यों में व्यक्तिगत मेहनताना विद्यार्थियों द्धारा न लिया जाए। संस्थान के नाम पर अगर कोई राशि दी जाती है, तो वह स्वीकार्य है।
13. दिन में नींद न लेना व एक दूसरे के रुम में न जाना,दुसरों के कमरे में पाये जाने पर फाइन स्वरुप राशि देना विशेष परिस्थितियों में संस्थान से निष्कासित किया जा सकता है।
14. आपस में भाईचारे का व्यवहार रखना व लडाई झगडा न करना। छोटे व बडो का सम्मान करना,सभी से विनयपूर्वक व्यवहार करना।
15. कमरे, बेडशीट की सफाई आदि अपना सब काम स्वयं करना, संस्थान परिसर को स्वच्छ रखना, अगर संस्थान परिसर अथवा स्वयं के कमरे का माहौल अस्वच्छ पाया गया तो फाइन/संस्थान से निष्कासन हो सकता है।
16. पारिवारिक-परिजन, मित्र, सगे-सम्बन्धी यदि संस्थान में मिलने आते हैं तो वे उनके कमरे में न जाकर संस्थान द्वारा निर्धारित स्थान पर ही मिल सकते हैं। अधिकतम 2 घण्टे ही वे संस्थान में ठहर सकते हैं । माह के अन्तिम रविवार को ही इस सुविधा का उपयोग कर सकते है।
17. पर्वाधिराज पर्युषण के अवसर पर स्वाध्यायी-सेवा एवं शिक्षण बोर्ड, जोधपुर की परीक्षा देना अनिवार्य है।
18. संस्थान में मोबाईल फोन का उपयोग निषेध है। अभिभावक द्वारा रात्रि 9 से 10 तक संस्थान के फोन न.0141- 2710946 पर विद्यार्थियों से सम्पर्क/बात की जा सकती है।
19. संस्थान द्धारा निर्धारित ड्रेस ही संस्थान परिसर में पहनना।
20. संस्थान द्धारा दिये गये निष्चित अवकाश के उपरान्त संस्थान में आने पर विशेष कार्यवाही एवं निर्धारित फाइन देना होगा।
21. संस्थान में होने वाली गतिविधियों के सम्बन्ध में संस्थान के बाहरी व्यक्ति से चर्चा-परिचर्चा नहीं करना।
22. संस्थान द्धारा आयोजित होने वाली समस्त सामूहिक गतिविधियों में भाग लेना अनिवार्य होगा।
23. काॅलेज/स्कूल में अनुशासित नहीं पाने जाने पर व वहाँ की रिपोर्ट नकारात्मक होने पर आवश्यक कार्यवाही।
24. संस्थान परिसर में या बाहर रहते हुए विद्यार्थियों द्धारा अपशब्द, गाली -गलौच एवं गलत आचरण देखा अथवा सुना गया तो संस्थान से निष्कासित किया जायेगा।
25. उक्त नियमों के अतिरिक्त समय समय पर कमेटी,संयोजक,व्यवस्थापक एवं प्राचार्य द्धारा बनाये गये नियमों का पालन भी अनिवार्य होगा।

सुमन कोठारी                                   डाॅ पी एस लोढ़ा

संयोजक                                           व्यवस्थापक

1. प्रतिवर्ष मार्च माह से संस्थान में प्रवेश हेतु रजिस्ट्रेशन प्रारंभ एवं माह जुन में प्रवेश हेतु साक्षात्कार।
2. माह जुलाई में संस्थान का नवीन सत्र प्रारंभ।
3. ग्रीष्मकालीन धार्मिक शिविरों में एवं पर्वाधिराज पर्युषण में  विद्यार्थियों द्धारा सेवाएं देना।
4. प्रतिमाह एक विशिष्ट व्यक्तित्व का मोटिवेशनल स्पीच व सेमिनार का आयोजन।
5. वाद-विवाद, भाषण, निबंध लेखन, क़्विज, गेम शो, कविता लेखन, प्रशनोत्तरी जैसे कार्यक्रम प्रतिमाह में कोई एक।
6. शिक्षण बोर्ड, जोधपुर द्धारा आयोजित परीक्षा में भाग लेना।
7. प्रतिवर्ष वार्षिकोत्सव एवं प्रति पांच वर्ष में पूर्व छात्र स्नेह मिलन समारोह का आयोजन।
8. सामूहिक रूप से प्रतिवर्ष परम श्रद्धेय आचार्य प्रवर एवं उपाध्याय प्रवर के दर्शन-वन्दन एवं प्रवचन श्रवण का लाभ।
9. ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान इंग्लिश स्पीकिंग एंव कम्प्यूटर प्रशिक्षण कार्यक्रम ।
10.संस्थान के विद्यार्थियों का शैक्षणिक एवं सामाजिक संस्थाओं में भ्रमण।
11. धार्मिक नाटिका एवं कार्यक्रमों में रोल प्ले करना।

संस्थान द्वारा दिये जाने वाले अवकाशों की सूची :-

क्र.स.  अवसर दिवस

1. रक्षाबन्धन – 3 दिन

2. दीपावली – 8 दिन

3. होली – 3 दिन

4. ग्रीष्मकालीन – 20 दिन

5. अन्य आकस्मिक – 8 दिन

कुल = 42

 आकस्मिक अवकाश में केवल घरेलु व अत्यन्त आवश्यक कार्यों पर ही अवकाश प्रदान किया जायेगा।
 उक्त अवकाशों के प्राप्त करने हेतु अभिभावक की पूर्व स्वीकृति के साथ प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है।

शपथ-पत्र

मैं……………………………..पुत्र श्री…………………………….. निवासी……………………… तहसील …………………….. जिला……………………….राज्य…………………..मो./फोन………………………………. अपने सुपुत्र …………………… को “आचार्य हस्ती आध्यात्मिक शिक्षण संस्थान” (गजेन्द्र चेरिटेबल ट्रस्ट द्धारा संचालित) जयपुर में  स्वेच्छा से दाखिला दिला रहा/रही हूँ। मैं शपथ लेता हूँ कि……….

  1. मेरे पुत्र का संस्थान में अस्थायी प्रवेश है जिसे संस्थान/ट्रस्ट को ही स्थाई करने का अधिकार रहेगा।
  2. संस्थान की किसी भी सम्पत्ति को हानि पहुँचाने या टूट-फूट होने पर उसका पूरा हर्जाना मेरे द्धारा भरा जायेगा।
  3. संस्थान में रहते हुए या बाहर कोई भी आकस्मिक दुर्घटना अथवा जान-माल की क्षति होने का विद्यार्थी स्वयं जिम्मेदार रहेगा, इन मामलों में संस्थान की कोई जिम्मेदारी नहीं रहेगी ।
  4. यह कि यदि मेरा पुत्र किसी भी असंवैधानिक गतिविधि में लिप्त पाया जाता है तो उसकी जिम्मेदारी मेरी स्वयं की होगी इस कार्यवाही में संस्थान/ट्रस्ट की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।
  5. यह कि मेरा पुत्र यदि संस्थान के पाठ्यक्रम को पूर्ण किये बिना एवं संस्थान समिति के निर्णय लिए बिना ही बीच में स्वेच्छा से जाता है तो जितने दिन यहाँ रहा है उसका प्रति माह के रुपये 2000 के हिसाब से संस्थान/ट्रस्ट को वापस करुँगा।
  6. स्कूल/ कॉलेज/संस्थान/ शिक्षण बोर्ड की परीक्षाओं में 70 प्रतिशत से कम अंक लाने पर संस्थान से निकालने का अधिकार रहेगा।
  7. यह कि मेरा पुत्र संस्थान के नियम व कायदों का पालना करेगा। पालना न करने पर संस्थान से निष्कासित किया जा सकता है।
  8. मेरा पुत्र संस्थान में रहकर प्राचार्य, कर्मचारीगण एवं छात्रों के साथ हमेशा सदव्यवहार करेगा। इसका कार्य एवं व्यवहार गरिमापूर्ण एवं मर्यादित रहेगा। यदि विद्यार्थी के कार्य व्यवहार व आचरण में किसी भी प्रकार की अनुचित क्रिया प्रदर्शित होती है तो संयोजक/व्यवस्थापक/प्राचार्य/कमेटी को विद्यार्थी को संस्थान से निष्कासित करने का पूर्ण अधिकार होगा।
  9. संस्थान द्धारा निर्धारित अवकाश के अतिरिक्त अन्य आकस्मिक अवकाश अभिभावक द्धारा लिखित में देने पर ही प्रदान किये जाये अवकाश हेतु किसी प्रकार का दबाव व याचना नहीं करुँगा। बिना आज्ञा जाने पर संस्थान से निष्कासित किया जा सकता है।
  10. मैं यह भी घोषणा करता हूँ कि मेरे स्थाई पता या दूरभाष नम्बर में परिवर्तन होने पर संस्थान को सूचित करूंगा।
  11. संस्थान की नियमावली को मैंने ध्यान से पढ लिया है तथा इस शपथ-पत्र की एक प्रति मैंने अपनी जानकारी के लिये अपने पास सुरक्षित रख ली है।

मैं………………………….पुत्र…………………………………….निवासी……………………………………………………….घोषणा करता हूँ कि मेरे द्धारा किसी तथ्य को छुपाया नहीं गया है। पूर्ण होश में बिना किसी के दबाव के मैं इस शपथ पत्र पर हस्ताक्षर कर रहा हूँ। मेरा पुत्र उपरोक्त सभी नियमों का पूर्ण पालन करेगा।

दिनांक……………….                               हस्ताक्षर शपथकर्ता…………………………….

स्थान…………………………..                    हस्ताक्षर गवाह (1)……………………………..

हस्ताक्षर गवाह (2)……………………………..

नोट-यह शपथ पत्र रुपये 50 के स्टाम्प पेपर पर लिखित एवं नोटेरी से प्रमाणित होना चाहिए |

छाया-चित्र

Downloads

ई-संदेश भेजे

Contact Person

team-3

आचार्य हस्ती आध्यात्मिक शिक्षण संस्थान, जयपुर

TEL: 0141-2710946
Email: ahassansthan@gmail.com

Contact Info

A-9, महावीर उध्यान पथ, बजाज नगर, जयपुर - 302015