रत्नसंघ

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अखिल भारतीय श्री जैन रत्न श्राविका मण्डल जोधपुर

प्रातः स्मरणीय पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री हस्तीमल जी म. सा. की प्रेरणा से भगवान महावीर स्वामी के दिव्य संदेशों को ग्राम-ग्राम, नगर-नगर तक श्राविकाओं द्धारा पहुँचाने के उद्देश्य से प्रस्फुटित अखिल भारतीय श्री जैन रत्न श्राविका मण्डल की पुर्नस्थापना 24 सितम्बर, 1994 को हुई।

“श्रा” -अर्थात् श्रद्धा पूर्वक शास्त्र श्रवण करना।
“वि” -अर्थात् विवेक पूर्वक उस पर चिन्तन, मनन, मंथन करना।
“का” -अर्थात् श्रुत ज्ञान को क्रियात्मक रुप देना।
“श्राविका”-अर्थात् शास्त्र वचनों को सुनकर एवं समझकर उनको विवेक पूर्वक आचरण में लाने का प्रयत्न करने वाली साधिका श्राविका कहलाती है।

युगद्रष्टा-युगमनीषी अध्यात्मयोगी परमाराध्य महामहिम आचार्य भगवन्त पूज्य श्री 1008 श्री हस्तीमलजी म.सा. के पावन गुण स्मरण कर गुलाबीनगरी-जयपुर में विराजित आगमज्ञ, प्रवचन-प्रभाकर, व्यसनमुक्ति के प्रबल प्रेरक परम श्रद्धेय आचार्य प्रवर पूज्य गुरूदेव श्री 1008 श्री हीराचन्द्रजी म.सा. महान् अध्यवसायी श्रद्धेय श्री महेन्द्र मुनिजी म.सा. आदि संत-मुनिराजों एवं महासतियांजी महाराज के पावन श्रीचरणों में हृदय की असीम आस्था से कोटि-कोटि वन्दन-नमन!!

24 सितम्बर, 1994 जोधपुर के बृहद अधिवेशन में संघ संरक्षक मण्डल के चेयरपर्सन माननीय श्री मोफतराजजी मुणोत के द्धारा अखिल भारतीय श्री जैन रत्न श्राविका मण्डल की स्थापना की गई । श्राविका मण्डल की देश भर में 58 शाखाएं व सम्पर्क सूत्र कार्यरत है। श्राविकाओं को स्वाध्यायी बनने की प्रेरणा समय-समय पर की जाती है।

 

राष्ट्रीय कार्यक्रम: – श्राविका मण्डल द्धारा वर्ष 2006-2007 में राष्ट्रीय कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया है। सामायिक-स्वाध्याय कार्यक्रम, चतुर्विध संघ-सेवा कार्यक्रम, संस्कार निर्माण शिविर कार्यक्रम, संस्कृति रक्षण कार्यक्रम, आध्यात्मिक प्रतियोगिता का आयोजन, आदर्श श्राविकारत्न, आराधना दिवस आदि कार्यक्रमों के द्धारा अपने कार्य संचालित कर रही है।

  • अ. भा. श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ की महिला शाखा एवं सहयोगी संस्था के रुप में कार्य करना व उनके उद्देश्यों की पूर्ति हेतु कार्य करना।
  • बच्चें में सुसंस्कार हेतु प्रयत्न करना। घरों में जो पारिवारिक संघर्ष बढ़ रहे हैं व आपसी प्रेम घट रहा है उसको सुधारने हेतु प्रयत्न करना।
  • बुजुर्गों, महिलाओं, बालकों व सहयोगियों की सेवा हेतु सदैव तत्पर रहना व सेवा कार्यों मे सदस्यों को जोड़ना।
  • जरूरतमंद महिलाओं को सहयोग देना।
  • समय-समय पर सन्त-सतीवृन्दों के दर्शन-वन्दन।
  • महिलाओं में लेखन, गायन व वकृत्त्वकला का विकास करने हेतु विविध कार्यक्रमों का आयोजन करना।
  • समाज में फैल रही कुरुतियों को रोकने का प्रयास करना।
  • चतुर्विध संघ के धार्मिक कार्यक्रमों व आयोजनों को सम्पन्न कराने हेतु सहयोग करना।
  • स्वाध्यायी प्रशिक्षण शिविरों एवं पर्युषण पर्व पर सेवाएँ देना।

अखिल भारतीय श्री जैन रत्न श्राविका मण्डल की देश भर में 59 शाखाएं व सम्पर्क सूत्र कार्यरत है। श्राविकाओं को स्वाध्यायी बनने की प्रेरणा करने के साथ श्राविकाओं, बालिकाओं व नवयुवतियों को शिक्षण बोर्ड की परीक्षा में भाग लेने हेतु प्रेरणा करने तथा श्रावक-श्राविकाओं में ज्ञानाभ्यास तथा बालक-बालिकाओं में सुसंस्कार वृद्धि के लिए श्राविका मण्डल विशेष रुप से सक्रिय हैं।

  • प्रातःकाल उठते ही तीन गुरूवन्दन कर दिन का शुभारम्भ करें।
  • प्रतिदिन बड़ों को प्रणाम करें।
  • प्रातःकालीन या सायंकालीन सामूहिक पारिवारिक प्रार्थना करें।
  • अभिवादन एवं टेलिफोन वार्ता का प्रारम्भ जय जिनेन्द्र से करें।
  • महिने में कम से कम चार दिन स्नान का त्याग करें।
  • पानी का अपव्यय नहीं करें।
  • महिने में कम से कम चार सामायिक करने का लक्ष्य रखें।
  • सामूहिक भोज में रात्रि भोजन एवं जमीकन्द का त्याग करें।
  • ग्राम/नगर में विराजित पूज्य संत-सतीवृन्द के नियमित दर्शन-वन्दन-प्रवचन श्रवण का लाभ लेंवे।
  • नगर में संचालित महिला मण्डल की साप्ताहिक सामायिक-स्वाध्याय संगोष्ठी में सहभागिता अवश्य दर्ज करावें।
  • हिंसाजनित सौन्दर्य प्रसाधनों, वस्त्रों एवं चमड़े से निर्मित वस्तुओं का प्रयोग न करें।
  • प्रतिदिन 15 मिनिट सत्साहित्य का स्वाध्याय करें।
  • प्रतिदिन सोने के पूर्व दिन भर में लगे दोषों के बारे में आत्मचिन्तन करें।
  • माह में न्यूनतम एक रात्रि संवर का लक्ष्य रखें।
  • अपने क्षेत्र में विचरण-विहार करने संत-सतीमण्डल की वैयावृत्य का लाभ लेंवे।
  • अ से ह तक बनने वाले प्रतिदिन किसी भी एक वस्तु का त्याग। जैसे अ-अनार, ह-हलवा आदि।
  • वर्ष में कम से कम एक बार सपरिवार गुरू भगवन्तों के दर्शन करें।
  • नित्यप्रति बच्चों में 15 मिनिट धार्मिक संस्कार देने का लक्ष्य रखें।
  • शर्त लगाकर खेले जाने वाले किसी भी खेल का न खेलें।
  • भक्तामर, कल्याणमन्दिर, नमिपवज्जा, दशवैकालिक सूत्र के चार अध्ययन/ पुच्छिसुणणं का नित्यपाठ करना।
  • नित्य नया ज्ञान सीखने का लक्ष्य रखें।
  • अष्टमी, चतुर्दशी आदि को घर में रहते कच्चे पानी का त्याग।
  • प्रतिमाह पाक्षिक प्रतिक्रमण अवश्य करना।
  • महिने में कम से कम पांच दिन चैविहार करना।
  • ब्रह्मचर्य की मर्यादा करना।
  • महिने में एक उपवास/एकासना/एकलठाणा/आयंबिल आदि करना।
  • सीखा हुआ ज्ञान हफ्ते में एक बार अवश्य पुनरावर्तन करना।
  • प्रतिदिन 15 मिनिट/30 मिनिट/एक घंटे तक मौन करना।
  • एक बहन को धर्म की राह में प्रेरित करना।
  • नित्य अपनी शक्ति अनुसार दान करना।
  • गुस्सा नहीं करना, आने पर प्रायश्चित रूप तुरन्त पांच नवकार मंत्र गिनना।
  • वर्ष में दो बार (बालक-बालिकाओं हेतु) धार्मिक शिविर का आयोजन।
  • वर्ष में एक बार (श्राविकाओं हेतु) धार्मिक शिविर का आयोजन।
  • वर्ष में एक बार विभिन्न क्षेत्रों में ”तनाव मुक्ति एवं व्यसन मुक्ति“ जैसे विषयों पर विचार प्रस्तुत करने के लिये कुशल एवं प्रभावी वक्ताओं को आमन्त्रित करना।
  • बालक-बालिकाओं एवं श्राविकाओं में वक्तृत्व कला के विकास हेतु भाषण प्रतियोगिता का आयोजन करना।
  • आर्थिक रूप से कमजोर स्वधर्मी भाई-बहिनों को अर्थ सहयोग करना।
  • बालक-बालिकाओं की शिक्षा की उचित व्यवस्था हेतु छात्रवृत्ति प्रदान करना।
  • सभी शाखाओं में प्रतिमाह सामूहिक सामायिक साधना का कार्यक्रम आयेाजित करना।
  • प्रत्येक क्षेत्र में बारह व्रत, सामायिक-प्रतिक्रमण सिखाने हेतु अध्यापकों की व्यवस्था करवाना।
  • ”बने आगम अध्येता“ का अधिकतम प्रचार-प्रसार करने का लक्ष्य।
  • श्राविकाओं को विहार-सेवा के लिए प्रोत्साहित करना।

अखिल भारतीय श्री जैन रत्न श्राविका मण्डल

अखिल भारतीय श्री जैन रत्न श्राविका मण्डल की देश भर में 59 शाखाएं व सम्पर्क सूत्र कार्यरत है। श्राविकाओं को स्वाध्यायी बनने की प्रेरणा करने के साथ श्राविकाओं, बालिकाओं व नवयुवतियों को शिक्षण बोर्ड की परीक्षा में भाग लेने हेतु प्रेरणा करने तथा श्रावक-श्राविकाओं में ज्ञानाभ्यास तथा बालक-बालिकाओं में सुसंस्कार वृद्धि के लिए श्राविका मण्डल विशेष रुप से सक्रिय हैं।

अखिल भारतीय स्तर पर दिनांक 20 से 22 सितम्बर 2013 तक धर्मनगरी-सवाईमाधोपुर में “अध्यात्म चेतना आयाम शिविर” का आयोजन किया गया जिसमें लगभग 450 श्राविकाओं ने भाग लिया। शिविर में जीवन में अनर्थ दण्ड से कैसे बचे, बारह व्रत, श्राविका का जीवन श्रद्धामय कैसे हो, सामायिक युक्त समता भाव की साधना, संघ की प्रभावना आदि विषयों पर विशद् चर्चा के साथ अध्यापन कराया गया। शिविर में प्रबुद्ध विद्वान अध्यापकों ने अपनी महनीय अध्यापन सेवाएँ प्रदान की। दिनांक 24 से 25 अगस्त, 2013 तक बैंकॉक में परिवार संस्कार जागृति शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में जैन जीवन-शैली अपनाना, बच्चों में संस्कार कैसे डालना, कर्मसिद्धान्त, मनुष्य जीवन की दुर्लभता, श्रावक की दिनचर्या आदि विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। शिविर में बालक-बालिकाओं ने प्रतिदिन नवकार महामंत्र का जाप करने एवं भोजन में जमीकन्द का त्याग जैसे नियम अंगीकार किए। शिविर में 125 परिवारों के 400 सदस्यों ने भाग लिया। शाखाओं से प्राप्त रिपोर्ट अनुसार श्राविकाएं काफी संख्या में प्रेरित होकर बारह व्रत अंगीकार कर रही है। कोटा में दिनांक 19 से 21 सितम्बर, 2014 तक शिविर आयोजित किया जा रहा है। शिविर आयोजित करने का मुख्य लक्ष्य यही है कि सभी श्राविकाएं कोई-न-कोई व्रत अवश्य अंगीकार करें एवं त्याग-तप के पच्चक्खाण अंगीकार कर गुरुदेव के श्रीचरणों में अपनी श्रद्धाभिव्यक्ति करें। श्राविकाओं के धार्मिक ज्ञान की अभिवृद्धि हेतु लगभग सभी शाखाओं में स्थानीय शिविरों का आयोजन किया गया। शिविरों में ज्ञान प्राप्त करने साथ ही इस बार अनेक श्राविकाओं ने स्वाध्याय संघ जोधपुर के माध्यम से पर्युषण सेवाएं प्रदान की।

चतुर्विध संघ-सेवा एवं सन्त-सतीवृन्द की विहार सेवा तथा संघ द्धारा आयोज्य धार्मिक कार्यक्रमों, महोत्सवों आदि को सफल बनाने में निरन्तर अपनी सेवाएँ प्रदान कर रही है।

गुरुद्वय आचार्य श्री हीराचन्द्रजी म.सा.-उपाध्याय श्री मानचन्द्रजी म.सा. के दीक्षा अर्द्धशती वर्ष में आगम अध्येता श्रावक-श्राविकाएं तैयार करने हेतु अखिल भारतीय श्री जैन रत्न श्राविका मण्डल द्धारा आगम स्वाध्याय अनुष्ठान रूप बने आगम अध्येता योजना प्रारम्भ की गई जिसमें श्रावक-श्राविका रूचि पूर्वक भाग ले रहे है। इस योजना में पूज्य संत-सतीवृन्द भी सहभागिता प्रदर्शित कर रहे है। पांच आगमों की परीक्षा के बाद इनके अध्येताओं में से पंचागम अध्येता प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया जायेगा जिसमें श्रेष्ठ पंचागम अध्येता का चयन करके उसे विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
बने आगम अध्येता में पूर्व में दशवैकालिकसूत्र पर आधारित खुली पुस्तक परीक्षा का आयोजन किया गया जिसमें अखिल भारतीय स्तर पर प्रथम, द्धितीय व तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को 31, 21, व 11 हजार रूपये तथा टाॅप 20 प्रतिभागियों को प्रत्येक को एक-एक हजार रूपये पारितोषिक प्रदान किये गये तथा 86 से 96 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले प्रत्येक प्रतिभागी को 500 रूपये प्रदान किये गये। इस प्रतियोगिता में करीब 2500 श्रावक-श्राविकाओं ने उत्साह पूर्वक भाग लिया।
उपासकदशांगसूत्र की प्रतियोगिता का परिणाम जिनवाणी में घोषित किया गया है। इस प्रतियोगिता में लगभग 3200 प्रतिभागियों ने भाग लिया है। अखिल भारतीय स्तर पर प्रथम, द्धितीय व तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को 31, 21, व 11 हजार रूपये तथा टाॅप 20 प्रतिभागियों को प्रत्येक को एक-एक हजार रूपये पारितोषिक प्रदान किये जायेंगे तथा 86 से 96 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले प्रत्येक प्रतिभागी को 500 रूपये तथा 70 से 85 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले प्रत्येक प्रतिभागी को 200 रूपये प्रदान किये जायेंगे।
वर्तमान में अन्तगड़दशासूत्र पर खुली पुस्तक परीक्षा का आयोजन चल रहा है। अन्तगड़सूत्र की समापक परीक्षा 5 अक्टूबर, 2014 को विभिन्न ग्राम-नगरों के परीक्षा केन्द्रों पर आयोजित की गई। आगामी नन्दीसूत्र पर मुख्य समापक परीक्षा का आयोजन 12 अप्रेल, 2015 को आयेाजित की जायेगी। नन्दीसूत्र के पश्चात् उत्तराध्ययनसूत्र, पर खुली पुस्तक परीक्षा प्रस्तावित है।

संस्कारों की वृद्धि के लिए संत-सतीवृन्द के दर्शन-वन्दन, प्रवचन-श्रवण की प्रेरणा के साथ ज्ञानाभ्यास वृद्धि हेतु संत-सतीवृन्द के जीवन पर आधारित प्रश्नोत्तरी के तहत जोधपुर शाखा द्धारा गुणसौरभ-गणिहीरा एवं हीरा प्रवचन पीयूष पुस्तक पर आधारित प्रश्नोत्तरी, जयपुर शाखा द्धारा मान व्याख्यान माला खुली पुस्तक परीक्षा एवं पच्चीस क्रिया, प्रतिक्रमण अर्थ सहित, पच्चीस बोल आदि पर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।

महापुरुषों के जन्म दिवस, पुण्य दिवस के अवसर पर विशेष रुप से त्याग-तप, दया-संवर आदि अनुष्ठानों में सभी शाखाओं की श्राविकाओं ने उत्साह पूर्वक भाग लिया। परम श्रद्धेय उपाध्यायप्रवर पं. रत्न श्री मानचन्द्रजी म.सा. के जन्म-दिवस पर 25 उपवास एवं 40 एकासन, आयंबिल की आराधना हुई।
साध्वीप्रमुखा शासनप्रभाविका महासती श्री मैनासुन्दरीजी म.सा. के 67 वीं दीक्षा जयन्ती पर एकासन के तेले 45-50 की संख्या में हुए। 10 उपवास एवं आयंबिल की साधना हुई। चैमासी चतुर्दशी पर भी श्रावक-श्राविकाओं ने उपवास-एकासन 100-150 की संख्या में तपाराधना हुई। परम श्रद्धेय आचार्यप्रवर-परम श्रद्धेय उपाध्यायप्रवर के दीक्षा अर्द्ध शताब्दी जयन्ती के उपलक्ष में 40-45 सिद्धि-तप चल रहे है। एकासन के वर्षीतप व उपवास के वर्षीतप दोनों मिलाकर करीब 100 से ज्यादा की संख्या में चल रहे है। जहाँ बहुमण्डल चल रहा है, वहां सामायिक सूत्र अर्थ सहित, जैनागम के प्रथम व द्धितीय भाग की तैयारी, प्रतिक्रमण का अर्थ सहित याद करवाने का लक्ष्य है।
दिनांक 27 अप्रेल, 13 को सामायिक सूत्र में (नवकार मंत्र अर्थ सहित) एवं पच्चीस बोल का एक बोल विस्तार से की, परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें करीब 150 श्राविकाओं ने भाग लिया। आगामी परीक्षा 25 मई, 2013 को तिक्खुत्तो का पाठ अर्थ सहित एवं पच्चीस बोल का दूसरा व तीसरा बोल की परीक्षा आयोजित की गई।
परम श्रद्धेय आचार्य श्री हस्तीमलजी म.सा. के 103 वीं जन्म दिवस पर, परम श्रद्धेय उपाध्यायप्रवर के 79 वां जन्म-दिवस पर जीवन परिचय सम्बन्धी एवं साध्वीप्रमुखा के जीवन परिचय पर भी परीक्षा का आयोजन किया गया जिसमें करीब 70-80 श्राविकाओं ने भाग लिया।
जोधपुर, नागौर, सवाईमाधोपुर, चेन्नई, कोलकाता आदि शाखाओं के उपनगरों में संचालित धार्मिक पाठशालाओं में श्राविकाओं द्धारा सेवाएं प्रदान की जा रही है।

श्राविका मण्डल की कतिपय शाखाओं में प्रतिक्रमण का अर्थ, बारह भावना, बारह व्रत व पच्चीस बोल आदि का अभ्यास श्राविकाओं को करवाया जा रहा है।
संत-सतीवन्द के चातुर्मासार्थ मंगल प्रवेश के साथ ही सभी चातुर्मास स्थलों पर श्रावक-श्राविकाओं द्धारा त्याग-तप एवं धर्माराधना के साथ धार्मिक प्रश्नोत्तरी, ज्ञान एवं संस्कारवर्द्धक कार्यक्रम चलाये जा रह है। सभी शाखाओं में अष्टमी, चतुर्दशी को सामूहिक प्रतिक्रमण, संवर एवं पौषध अच्छी संख्या में हो रहे है। कतिपय शाखाओं में पचरंगी एवं नवरंगी के आयोजन करने के साथ पर्युषण पर्व के अवसर पर श्राविका मण्डल द्धारा धार्मिक परीक्षाओं का आयोजन किया गया।
जिनशासन गौरव परम श्रद्धेय आचार्यप्रवर पूज्य श्री हीराचन्द्रजी म.सा. के जन्म-दिवस को साधना सप्ताह के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर एकासन, उपवास एवं तेले की भी आराधन हुई। जन्म-दिवस को त्याग-तप के रूप में हर्ष व उल्लास के साथ मनाया गया।

अखिल भारतीय श्री जैन रत्न मण्डल ने जोधपुर में सहकार, सहयोग, सम्बल प्रकोष्ठ कार्यक्रम हाथ में लिया है। इस कार्यक्रम में सभी से निवेदन किया गया घर में ऐसी कई सामग्री है जो उपयोग में नहीं आ रही है, वे वस्तुएं दूसरों को प्रदान कर उस परिवार का सहयोग कर सकते है। बच्चों की स्कूल ड्रेस, फीस, कपड़े खाद्य सामग्री आदि। आपके सहयोग से उस परिवार को समब्ल प्राप्त होगा।

आचार्यप्रवर के सान्निध्य में 01 से 03 अगस्त, 2014 तक त्रिदिवसीय “स्वाध्यायी शिविर” का आयोजन किया गया जिसमें अलीगढ़, कुश्तला, चैथ का बरवाड़ा व सवाईमाधोपुर क्षेत्र की महिला स्वाध्यायियों ने भाग लिया।
जोधपुर में प्रथम स्वाध्यायी संगोष्ठी का शुभारम्भ 10 जुलाई, 2014 को प्रारम्भ किया गया। श्राविका मण्डल की अधिकांश शाखाओं में सामूहिक संगोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है। संत-सतीवृन्द की सेवा में श्राविकाओं द्धारा ज्ञानाराधना के क्षेत्र में नवीन ज्ञान सीखने का कार्यक्रम निरन्तर चल रहा है।

श्राविका मण्डल के केन्द्रीय पदाधिकारियों द्धारा शाखाओं का प्रवास करके शाखा में चलने वाली गतिविधियों की प्रगति की जानकारी ली गई एवं श्राविका मण्डल द्धारा संचालित राष्ट्रीय अभियानों की सफलता के लिए प्रेरणा की गई। प्रवास कार्यक्रम में पदाधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय अध्यक्ष/मंत्री एक-दूसरे से बराबर सम्पर्क बनाए रखे हुए है।

स्वधर्मी वात्सल्य सेवा हेतु श्राविका मण्डल निरन्तर प्रयासरत है। श्राविका मण्डल बच्चों को स्कूल फीस, ड्रेस तथा औषधोपचार आदि में सहयोग प्रदान करती है। विभिन्न श्राविकाओं द्धारा युवक परिषद् द्धारा संचालित आचार्य हस्ती मेधावी छात्रवृत्ति योजना के अन्तर्गत सहयोग प्रदान किया जा रहा है।

अखिल भारतीय श्री जैन रत्न श्राविका मण्डल द्धारा मण्डल में प्रेम, संगठन एवं सौहार्द की भावना का विकास हो इस हेतु वार्षिक अधिवेशन रखा जाता है। अधिवेशन में सर्वश्रेष्ठ शाखा का चयन कर एवं तपस्या, विहारचर्या, स्वधर्मी वात्सल्य, संघ-सेवा आदि प्रकल्पों के लिए शाखाओं को तथा श्राविकाओं को सम्मानित किया जाता है।

अखिल भारतीय श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ व श्राविका मण्डल के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 22 दिसम्बर, 2013 को खोह (जिला-अलवर) में क्षेत्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ-साथ पल्लीवाल क्षेत्र के श्रावक-श्राविकाओं ने भी भाग लिया। सम्मेलन में माताएं अपने बच्चों को कैसे संस्कार प्रदान करें, की जानकारी प्रदान की गई। सम्मेलन में वीरमाता-पिताओं का सम्मान किया गया तथा तपस्वी श्रावक-श्राविकाओं का अभिनन्दन किया गया।

श्राविका मण्डल की स्थानीय शाखाओं द्धारा अपनी-अपनी शाखा में साप्ताहिक, पाक्षिक एवं मासिक संगोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है। संगोष्ठी के आयोजन से आपस में स्नेह एवं सौहार्द की भावना की अभिवृद्धि होती है। संगोष्ठी के माध्यम से ज्ञानार्जन के साथ त्याग-तप एंव धर्माराधना में श्राविकाएं सतत् आगे बढ़ रही है।

हम श्राविकाएं ज्ञान-दर्शन-चारित्र के विविध कार्यक्रमों में सक्रिय है और हमारे सद्प्रयासों से घर-परिवार में धर्म का वातावरण निरन्तर पुष्ट हो रहा है। समाज में फैली कुरीतियों के निवारण में हम-बहिनों का योगदान कम नहीं है। व्यसन और फैशन से दूर रहने की निरन्तर और प्रभावी प्रेरणा हमारे धर्माचार्य-धर्मगुरु और संत-सतीवृन्द करते हैं, हम श्राविकाएं प्राप्त प्रेरणा का घर-घर संचरण करती हैं। व्यसन से प्रायः बहिनें दूर है फैशन से भी वैसी दूरी बनी रहे इस लक्ष्य की प्राप्ति में हम सक्रिय हैं। दहेज प्रथा और भ्रूणहत्या रोकने में भी हमारे प्रयास कारगर हो रहे हैं। व्यावहारिक शिक्षा के साथ धार्मिक ज्ञान व रुचि बढ़ाने में हमारा योगदान है।
वर्तमान में अखिल भारतीय श्री जैन रत्न श्राविका मण्डल पूरे देश भर में रत्नसंघ श्राविकाओं में लाल चन्दूड़ी की साड़ी (ड्रेस कोड) करने का लक्ष्य रखा है जिसका प्रयास सभी शाखाओं में जारी है व शीघ्र ही यह कार्य सुचारू रूप से सम्पन्न होने की संभावना है।
आप सबके सहयोग की अपेक्षा के साथ ………………….

मुख्य कार्यालय
अखिल भारतीय श्री जैन रत्न श्राविका मंडल संघ
सामायिक स्वाध्याय भवन
प्लाट नं. 2, नेहरू पार्क
जोधपुर – 342003
Email: shravikamandal@yahoo.com

Bank Details
A/c Name :AKHIL BHARTIYA SHRI JAIN RATNA SHRAVIKA MANDAL
A/c No. :0232000100582506
Bank name :PUNJAB NATIONAL BANK
IFSC Code :PUNB0023200
Branch :MGH ROAD, JODHPUR (RAJ.)

केन्द्रीय - पदाधिकारी

अध्यक्ष

श्रीमती अलका जी दुधेड़िया

कार्याध्यक्ष

श्रीमती संगीता जी बोहरा-चेन्नई

कार्याध्यक्ष

MONIKAJI DANGI-KISHANGARH

श्रीमती मोनिका जी डांगी-किशनगढ़

महासचिव

श्रीमती श्वेता जी कर्नावट-जोधपुर

अध्यक्ष

श्रीमती मंजू जी भण्डारी

कार्याध्यक्ष

श्रीमती बीना जी मेहता

कार्याध्यक्ष

श्रीमती सुशीला जी भण्डारी

महासचिव

श्रीमती अलका जी दुधेड़िया

अध्यक्ष

श्रीमती पूर्णिमा जी लोढ़ा

कार्याध्यक्ष

श्रीमती मीना जी गोलेच्छा

कार्याध्यक्ष

श्रीमती सुशीला जी भण्डारी

महासचिव

श्रीमती बीना जी मेहता

अध्यक्ष

श्रीमती पूर्णिमा जी लोढ़ा

कार्याध्यक्ष

श्रीमती मंजू जी भण्डारी

कार्याध्यक्ष

श्रीमती मीना जी गोलेच्छा

महासचिव

श्रीमती बीना जी मेहता

अध्यक्ष

श्रीमती मधु जी सुराणा

कार्याध्यक्ष

श्रीमती पूर्णिमा जी लोढ़ा

महासचिव

श्रीमती शशि जी टाटिया

अध्यक्ष

डॉ. मंजुला जी बम्ब

कार्याध्यक्ष

श्रीमती मधु जी सुराणा

महासचिव

श्रीमती आशा जी गांग

अध्यक्ष

डॉ. सुषमा जी सिंघवी

कार्याध्यक्ष

श्रीमती चन्द्रा जी मुणोत

महासचिव

डॉ. बिमला जी भण्डारी

अध्यक्ष

श्रीमती विमला जी मेहता

कार्याध्यक्ष

श्रीमती विजया जी मलारा

महासचिव

श्रीमती अकलकंवर जी मोदी

अध्यक्ष

श्रीमती विमला जी मेहता

कार्याध्यक्ष

श्रीमती मंजू जी कोठारी

महासचिव

डॉ. बिमला जी भण्डारी

अध्यक्ष

डॉ. सुषमा जी सिंघवी

कार्याध्यक्ष

श्रीमती विमला जी मेहता

महासचिव

श्रीमती सुनीता जी मेहता

छाया-चित्र

पत्रावली

आगामी कार्यक्रम

ई-संदेश भेजे