Logoसम्यग्ज्ञान प्रचारक मण्डल, जयपुर

महान् ज्योतिर्धर क्रियाद्धारक जैनाचार्य पूज्य श्री रत्नचन्द्र जी म.सा. की स्वर्गारोहण शताब्दी के पुनीत अवसर पर सम्वत् 2002 में उन्हीं महान् आचार्य प्रवर के पाटानुपाट आचार्य प्रातः स्मरणीय अखण्ड बाल ब्रह्यचारी चारित्र चूड़ामणि पूज्य गुरुदेव परम श्रद्धेय आचार्य प्रवर श्री हस्तीमल जी म.सा. के सदुपदेशों को जन-जन तक पहुंचाने की भावना से प्रेरित होकर रत्नवंश की परम्परा के संघ सेवी महानुभावाओं द्धारा सम्यग्ज्ञान के प्रचार-प्रसार एवं शांसन सेवा के पुनीत उद्देश्य से बड़लू (भोपालगढ़) में ’’सम्यग्ज्ञान प्रचार मण्डल’ की संस्थापना की गई।
1. नाम व स्थापना इस संस्था का नाम ’’ सम्यग्ज्ञान प्रचारण मण्डल’’ है व रहेगा।
2. पंजीकृत कार्यालय इस संस्था का कार्यालय राजस्थान राज्य के जयपुर नगर में होगा।
3. उद्देश्य

(1) सम्यग्ज्ञान व सम्यग्दर्शन का प्रचार-प्रचार करना।
(2) स्थान-स्थान पर स्वाध्यान केन्द्रों की स्थापना करना व संचालन करना।
(3) आगम व जनोपयोगी साहित्य का प्रकाशन करना ।
(4) सत्साहित्यादि साधनों से अहिंसा, अनेकान्त एवं अपरिग्रहादि सिद्धान्तों का प्रचार-प्रसार करना।
(5) नैतिक एवं सम्यग्ज्ञान, दर्शन, चरित्र जागृति के लिए ’’जिनवाणी’’ मासिक पत्रिका एवं अन्य पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन करना।
(6) राष्ट्र व समाज में शिक्षण संस्थानों, विध्यालयों, शोध संस्थानों, वाचनालयों, छात्रावासों की स्थापना करना एवं उन्हें व्यवस्थित करना।
(7) जन-साधरण को सम्यग्ज्ञान अर्थात् सही ज्ञान व सही शिक्षा देने के उद्देश्य से सत् साहित्य का प्रचार-प्रसार करना तथा इस प्रकार के साहित्य को खरीदना, निःशुल्क वितरण, भेंट अथवा पुरस्कार में देना व प्रकाशित करना।
(8) जन साधरण का नैतिक स्तर ऊँचा हो तथा नागरिकों में कर्मठता अधिक-से अधिक आए इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु कार्यशाला, संगोष्ठियाँ, व्याख्यान माला, लेखमाला, प्रतियोगिता, वाद-विवाद प्रतियोगिता आदि का आयोजन एवं इस प्रकार के कार्य करने वालों की मदद करना।
(9) उपरोक्त उद्देश्यों की पूर्ति हेतु साधना जुटाना, धन एकत्रित करना, कोष की स्थापना करना, भूमि एवं भवन खरीदना व अति आवश्यक होने पर बेचना, निर्माण करना व करवाना।
(10) व्यसन मुक्ति के उन्नयन हेतु आवश्यक कार्य करना।
(11) उपरोक्त उद्देश्यों की पूर्ति में कार्यरत अन्य चेरिटबल संस्थाओं के साथ मिलकर कार्य करना।
(12) उपरोक्त उद्देश्यों की पूर्ति हेतु अन्य आवश्यक कार्य करना।

साहित्य सदस्यता

सत्साहित्य का प्रकाशन-श्रावक-श्राविकाओं में सामायिक स्वाध्याय के प्रति रुचि बढ़े इस उद्देश्य से सत्साहित्य प्रकाशन प्रारम्भ हुआ। 1993 तक मंडल में लगभग 30-40 पुस्तकों का प्रकाशन होता था। वर्तमान में मंडल कार्यालय से लगभग 168 पुस्तकों का आगम, जैनधर्म का मैलिक इतिहास चारों भाग हिन्दीं, अंग्रेजी एवं गुजराती भाषा सहित का प्रकाशन हो चुका है। आचार्यप्रवर एवं उपाध्यायप्रवर के 50वें दीक्षा जयन्ति वर्ष के अन्तर्गत चार-पाँच नई पुस्तकों का प्रकाशन किया जना प्रस्तावित है, इस प्रकार मंडल से 200 से ऊपर पुस्तकों का प्रकाशन किया जा रहा है। हमारी हार्दिक अभिलाषा है कि मंडल के सत्साहित्य में निरन्तर अभिवृद्धि होती रहे इसके लिए जैनधर्म का मौलिक इतिहास भाग-5 को शीध्र प्रकाशित करने का प्रयत्न किया जा रहा है और यह भी चिन्तन है कि मंडल द्वारा 32 आगमों का भी प्रकाशन हो। वर्ष 1992 तक मंडल के सत्साहित्य के 300-350 आजीवन सदस्य थे जबकि 1993 से वर्तमान में मंडल से प्रकाशित सत्साहित्य के 774 आजीवन सदस्य बनें हुए हैं। इस तरह निरन्तर प्रगति की ओर कदम बढ़ रहे हैं।

सम्यग्ज्ञान प्रचारक मण्डल से प्रकाशित सत्साहित्य की सूची निम्न प्रकार से है –

क्र.सं.पुस्तक का नामलेखक/सम्पादक/प्रेरकदर
1अमरता का पुजारीपं. शशिकान्त झा15
2अमृत-वाक्आ. श्री हस्तीमल जी म.सा.10
3अजीव पर्यायश्री धर्मचन्द जी जैन5
4आवश्यक सूत्र (हिन्दी/अंग्रेजी)संकलित10
5आवश्यक मलियागिरी वृत्तिआ. श्री हस्तीमल जी म.सा.125
6आहार संयम और रात्रि भोजन त्यागआ. श्री हीराचन्द्र जी म.सा.4
7आचाररांग सूत्र (मूल)संकलित10
8आध्यात्मिक आलोकआ. श्री हस्तीमल जी म.सा.50
9आत्म परिष्कारआ. श्री हस्तीमल जी म.सा.5
10आत्म चिन्तनश्री भंवरलाल जी बोथरा5
11आनुपूर्वीसंकलित10
12अहिंसा निउणा दिठ्टाप्रो. कल्याणमल जी लोढ़ा40
13अध्यात्म की ओरश्री जसराज जी चौपड़ा40
14अन्तगडदसा सूत्रआ. श्री हस्तीमल जी म.सा.30
15अचित जल का विज्ञान एवं जलडाॅ. जीवराज जी  जैन50
16भक्तामर स्तोत्रश्री जम्बू कुमार जी जैन10
17भगवान महावीरसंकलित40
18चौदह नियमसंकलित5
1924 ठाणा का थोकड़ाश्री धर्मचन्द जी जैन5
20उेपलशीषि झीरूशीआ. श्री हस्तीमल जी म.सा.25
21दशवैकालालिकसूत्रआ. श्री हस्तीमल जी म.सा.60
22दशवैकालालिकसूत्र (हिन्दी भावार्थ)आ. श्री हस्तीमल जी म.सा.20
23दीक्षा कुमारी का प्रवासआ. श्री हस्तीमल जी म.सा.25
24दो बातश्री शशिकान्त म.सा.5
25दुर्गादास पदावलीमु. श्री लक्ष्मीचन्द जी म.सा.5
26दुःखहरित सुखश्री कन्हैयालाल जी लोढ़ा40
27द्रव्यलोकप्रकाशसंकलित100
28एकादश चरित्र संग्रहश्री सम्पतरात जी डोसी15
29ऐतिहासिक काल के तीन तीर्थमरआ. श्री हस्तीमल जी म.सा.100
30गजेन्द्र सुक्ति सुधाआ. श्री हस्तीमल जी म.सा.20
31गजेन्द्र व्याख्यान माला भाग – 1आ. श्री हस्तीमल जी म.सा.15
32गजेन्द्र व्याख्यान माला भाग – 2आ. श्री हस्तीमल जी म.सा.15
33गजेन्द्र व्याख्यान माला भाग – 3आ. श्री हस्तीमल जी म.सा.25
34गजेन्द्र व्याख्यान माला भाग – 4आ. श्री हस्तीमल जी म.सा.15
35गजेन्द्र व्याख्यान माला भाग – 5आ. श्री हस्तीमल जी म.सा.15
36गजेन्द्र व्याख्यान माला भाग – 6आ. श्री हस्तीमल जी म.सा.15
37गजेन्द्र व्याख्यान माला भाग – 7आ. श्री हस्तीमल जी म.सा.15
38गजेन्द्र पद मुक्तावलीआ. श्री हस्तीमल जी म.सा.5
39गमा का थोकड़ाश्री धर्मचन्द जी जैन10
40गौतम से प्रभु फरमाते हैंसंकलित70
41गुणस्थान स्वरूपश्री धर्मचन्द जी जैन5
42गुरु हस्ती-गुरु हीरा अनमोल भजनसंकलित20
43गुण सौरभ गणि हीरासंकलित100
44ज्ञानसूत्र की कथायेंश्री दीपचन्द जी संचेती10
45ज्ञान लब्धि, द्रव्येन्द्रिय का थोपड़ाश्री धर्मचन्द जैन2
46हीरा प्रवचन पीयूष भाग-1आ. श्री हीराचन्द्र जी म.सा.30
47हीरा प्रवचन पीयूष भाग-2आ. श्री हीराचन्द्र जी म.सा.30
48हीरा प्रवचन पीयूष भाग-3आ. श्री हीराचन्द्र जी म.सा.30
49हीरा प्रवचन पीयूष भाग-4आ. श्री हीराचन्द्र जी म.सा.30
50चिंतन के आयामडाॅ. धर्मचन्द जी जैन40
51जैनइतिहास के प्रसंग भाग-1 से 40संकलित प्रत्येक का मूल्य5
52जैन आचार्य चरितावलीआ. श्री हस्तीमल जी म.सा.15
53जैन स्वाध्याय सुभाषित मालाआ. श्री हस्तीमल जी म.सा.10
54जैन तमिल साहित्य और तिरुकुरलडाॅ. इन्दरराज बैद20
55जैन धर्म का मौलिक इतिहास-1आ. श्री हस्तीमल जी म.सा.250
56जैन धर्म का मौलिक इतिहास-2आ. श्री हस्तीमल जी म.सा.250
57जैन धर्म का मौलिक इतिहास-3आ. श्री हस्तीमल जी म.सा.250
58जैन धर्म का मौलिक इतिहास-4आ. श्री हस्तीमल जी म.सा.250
59जैनधर्म का मौलिक इतिहास संक्षिप्त 1आ. श्री हस्तीमल जी म.सा.75
60जैनधर्म का मौलिक इतिहास संक्षिप्त 2आ. श्री हस्तीमल जी म.सा.75
61जैनधर्म का मौलिक इतिहास संक्षिप्त 3आ. श्री हस्तीमल जी म.सा.75
62जैनधर्म का मौलिक इतिहास संक्षिप्त 4आ. श्री हस्तीमल जी म.सा.75
63जैन लीजेण्ड (अँग्रेजी में) भाग-1संकलित150
64जैन लीजेण्ड (अँग्रेजी में) भाग-2संकलित150
65जैन लीजेण्ड (अँग्रेजी में) भाग-3संकलित150
66जैन लीजेण्ड (अँग्रेजी में) भाग-4संकलित150
67जैनागम के स्तोक रत्नश्री केवलमल जी लोढ़ा20
68जैन विचारधारा में शिक्षाश्री चाँदमल जी कर्णावट25
69जैन धर्म में ध्यानश्री कन्हैयालाल जी लोढ़ा70
70जिनवाणी विशेषांक-जैनागमसंकलित50
71जिनवाणी विशेषांक-प्रतिक्रमणसंकलित50
72जिनवाणी विशेषांक-गुरु गरिमा और..संकलित100
73जिनवाणी विशेषांक-संवत्सरिसंकलित20
74जिनवाणी-आगमादर्श आ. श्री हीरासंकलित100
75जिज्ञासा समाधनश्री धर्मचन्दजी जैन25
76झलकियाँ जो इतिहास बन गईंश्रीमती अनुपमा कर्णावट20
77जीवन निर्माण भूजावलीसंकलित2
78जीवन अमृत की छाँवशा.प्र. मैनासुन्दरी जी म.सा20
79जीव धड़ाश्री धर्मचन्द जी जैन3
80जीव पज्जवा, काय स्थितिश्री धर्मचन्द जी जैन5
81जीवन का संध्या कालसंकलित0
82कर्म प्रकृतिश्री धर्मचन्द जैन2
83कर्मग्रन्थश्री केवलमल लोढ़ा15
84कर्मग्रन्थ-1श्री धर्मचन्द जैन10
85कर्मग्रन्थ-2श्री धर्मचन्द जैन10
86कुलक कथायेंआ. श्री हस्तीमल जी म.सा.20
87कायोत्सर्गश्री कन्हैयालाल जी लोढ़ा50
88क्रियोद्वारक रत्नचंदजी म.सा. की …डाॅ. इन्द्र जैन20
89कवयित्री महासती जड़ावकँवर जी …डाॅ. इन्द्र जैन15
90लघुदण्डकश्री धर्मचन्द जैन3
91लोकाकाश-एक वैज्ञानिक …डाॅ. जीवराज जैन35
92नवतत्त्वश्री धर्मचन्द जैन10
93निसीहज्झयणं (मूल)संकलित10
94निग्र्रन्थ भूजावलीमु.श्री श्रीचन्द जी म.सा.40
95नमो गणि गजेन्द्रायप्रो. कल्याणमल लोढ़ा20
96नैतिकता का विकासप्रो. चन्दनबाला मारू20
97पच्चीस बोल (विवेचन सार्थ)श्रीमती सुनीता मेहता10
9825 बोल (मूल)श्रीमती सुनीता मेहता3
99पाँच बातमु. श्री लक्ष्मीचन्द जी म.सा.5
100पथ की रुकावटेंशा.प्र. मैनासुन्दरी जी म.सा.15
101प्रश्नव्याकरण सूत्र भाग-1आ. श्री हस्तीमल जी म.सा.45
102प्रश्नव्याकरण सूत्र भाग-2आ. श्री हस्तीमल जी म.सा.35
103प्रार्थना प्रवचनआ. श्री हस्तीमल जी म.सा.15
104प्रथमा पाठ्यक्रम (प्रतिक्रमणसूत्र)श्री पाश्र्व कुमार मेहता5
105प्रेरक कथाएँश्री गोतमचन्द जी जैन20
106पर्युषण साधनाआ. श्री हस्तीमल जी म.सा.5
107पर्युषण सन्देशश्री जशकरण डागा20
108पर्युषण पर्वाराधनशा.प्र. मैनासुन्दरी जी म.सा.15
109मुक्तक-मुक्ताडाॅ. दिलीप धींगा15
110मुक्तक-राहीसम्पतराज चैधरी100
111मान व्याख्यान मालानौरतन मेहता25
112महान् अध्यात्म योगी आचार्य हस्तीडाॅ.चंदनबाला मारु25
113रत्नसंघ के धर्माचार्यपं. दुःखमोचन झा25
114रत्नसंघ की दिव्य मणिश्री धर्मचन्द जैन10
115रत्नस्तोक मंजूषाश्री धर्मचन्द जैन5
116रत्न-मंजूषाश्री रतनलाल सी बाफणा15
11767बोल उपयोग, संज्ञा और …श्री धर्मचन्द जैन2
11847 बोल, 50 बोल व 800 बोलश्री धर्मचन्द जैन5
119सबको प्यारे प्राणश्री रतनलाल सी. बाफणा30
120समिति गुप्ति-गति आगतिश्री धर्मचन्द जैन2
121सामायिक सूत्र प्रवेशिका पाठ्यक्रमसंकलित5
122डरारूळज्ञ डीरासंकलित5
123संस्कृत व्याकरण भाग-1श्री प्रकाशचन्दजी जैन10
124संस्कृत व्याकरण भाग-2श्री प्रकाशचन्दजी जैन10
125संस्कारम्श्रीमती नीलूजी डागा150
126सप्त कुव्यसनप्रो. चाँदमल कर्णावट5
127षडद्रव्य एवं विचार पंचशिकाआ. श्री हस्तीमल जी म.सा.5
128सिरि अन्तगडदासओसूत्रआ. श्री हस्तीमल जी म.सा.35
129सैद्धान्तिक प्रश्नोत्तरीश्री कन्हैयालाल लोढ़ा5
130शिवपूरी की सीढ़ियाँशा.प्र. श्री मैनासुन्दरी जी म.सा.15
131शास्त्र स्वाध्याय मालासंकलित25
132श्रमण आवश्यक सूत्रश्री पाश्र्वकुमार मेहता10
133श्रावक सामायिक प्रतिक्रमण सूत्रश्री पाश्र्वकुमार मेहता10
134श्रावक के बारह व्रतसंकलित5
135श्री सामायिक सूत्र (सार्थ)संकलित5
136श्री सामायिक सूत्र (मूल)संकलित1
137श्री नवपद आराधनाआ. श्री हस्तीमल जी म.सा.5
138नन्दीसूत्रम्आ. श्री हस्तीमल जी म.सा.60
139सुख विपाक सूत्रश्री जम्बू कुमार जैन10
140स्वाध्याय स्तवन मालाश्री सम्पतराज डोसी35
141सामासिक साधना और स्वाध्यायआ. श्री हस्तीमल जी म.सा.10
142उत्तराध्ययनसूत्र भाग-1आ. श्री हस्तीमल जी म.सा.60
143उत्तराध्ययनसूत्र भाग-2आ. श्री हस्तीमल जी म.सा.100
144उत्तराध्ययनसूत्र भाग-3आ. श्री हस्तीमल जी म.सा.100
145उत्तराध्ययनसूत्र हिन्दीआ. श्री हस्तीमल जी म.सा.50
146उत्तराध्ययनसूत्र पद्यानुवादआ. श्री हस्तीमल जी म.सा.20
147उपासकदशांग सूत्रश्री प्रकाशचन्द जी जैन60
148युवा सँवारे यौवनश्री पदमचन्द जी गाँधी20
149वैराग्य शतकमु.श्री लक्ष्मीचन्द जी म.सा.5
150विचारों के आभूषणश्री रतनलाल सी. बाफना25
151व्रत प्रवचन संग्रहआ. श्री हीराचन्द्र जी म.सा.10
152वृहत्कल्पसूत्रम् (सटीकम्)आ. श्री हस्तीमल जी म.सा.30
153वृहद् आलोयणासंकलित5

नोट:
(1) उक्त पुस्तकें वर्तमान में उपलब्ध नहीं है।
(2) पुस्तक मँगवाने पर पोस्टेज, कोरियर, ट्रांसपोर्ट, पैकिंग आदि का खर्चा पुस्तक क्रेता को ही वहन करना होगा।
(3) आॅर्डर के साथ आॅर्डर राशि का बैंक ड्राफ्ट/मनिआॅर्डर ’’सम्यग्यज्ञान प्रचारक मण्डल’’ के नाम से भिजवाये।
(4) आॅर्डर प्राप्त होने पर कार्यलय में अगर कोई पुस्तक उपलब्ध नहीं होगी वह नहीं भिजवाई जायेगी।
(5) मण्डल का 20 वर्षिय साहित्य सदस्यता शुल्क सम्पूर्ण साहित्य का रुपये 4,000/-

मण्डल का 20 वर्षिय साहित्य सदस्यता शुल्क सम्पूर्ण साहित्य का रुपये 4,000/-

माहदिनांककार्यक्रम
जुलाई आवश्यकसूत्र आगम का प्रकाशन, नियंता-संजया
अगस्त 06.08.2016उपासकदशांगसूत्र पर संगोष्टि, किशनगढ़ अन्तगडसूत्र आगम का प्रकाशन
07.08.2016उपासकदशांगसूत्र पर संगोष्टि, किशनगढ़ अन्तगडसूत्र आगम का प्रकाशन
सितम्बर 17.09.2016कार्यकारिणी बैठक
18.09.2016वार्षिक आमसभा
अक्टूबर 01.10.2016विद्ववत परिषद् संगोष्टि, निमाज
02.10.2016विद्ववत परिषद् संगोष्टि, निमाज
नवम्बर
दिसम्बर
जनवरी
फरवरी
मार्च
अप्रैल
मई
जून
मुख्य कार्यालय
सम्यग्ज्ञान प्रचारक मण्डल
दुकान नं. 182 के ऊपर,
बापू बाजार, जयपुर-302003 (राजस्थान)
फोन 0141-2575997, 2571163
फैक्स नं. 0141-4068798
Email : sgpmandal@yahoo.in

Bank Details
A/c Name :SAMYAG GYAN PRACHARAK MANDAL 
A/c No. :51026632997
Bank name :STATE BANK OF BIKANER & JAIPUR
IFSC Code :SBBJ0010843
Branch :BAPU NAGAR, JAIPUR(RAJ.)

जिनवाणी

जिनवाणी पत्रिका – आचार्य भगवन्त श्री हस्तीमलजी म.सा. बहुत दूरदर्शी एवं चिन्तनशील महापुरुष थे, उन्होंने चिन्तन किया कि समाज का ज्ञान बढ़ाने व श्रावक-श्राविकाओं में जानकारी के लिए एक जैन पत्रिका की अति आवश्यकता है। उस समय स्थानकवासी समाज में 1-2 जैन पत्रिका ही प्रकाशित होती थी वो भी सुचारू रूप से नहीं थी। अतः आचार्य भगवन्त ने सोच समझकर कि प्रभु की वाणी घर-घर पहुँचे। इस दृष्टि से पत्रिका का नाम ’’जिनवाणी’’ रखा जो अपने आप में आकषर्क है। इस पत्रिका का प्रकाशन ईस्वी सन् 1943 में जैन रत्न विध्यालय भोपालगढ़ से प्रारम्भ हुआ। कुछ वर्ष बाद जोधपुर में कार्यलय आ गया। वर्ष 1954 में जयपुर में कार्यलय प्रारम्भ हुआ। प्रारम्भ में करीब 30 पृष्ठों में साधारण कागज पर मुद्रित होती थी तथा मुख्य कवर पृष्ठ हैण्डमेड पेपर पर मुद्रित होता था। 1967 से डाॅ. नरेन्द्रजी भागवत सम्पादक बनें जबसे इस पत्रिका की अभिवृद्धि होने लगी।
अक्टूम्बर 1994 से डाॅ. धर्मचन्दजी जैन् ने सम्पादक पद ग्रहण किया तब से आज तक, विशेषकर आचार्य श्री हीराचन्द्रजी म.सा. द्धारा समय-समय पर मार्ग-दर्शन से व प्रोफेसर धर्मचन्दजी जैन के अथक प्रयास से यह पत्रिका अन्दर की विषय सामग्री एवं आकर्षक कवर आदि से जैन एवं जैनेतर समाज में विशेष प्रसिद्धि प्राप्त कर चुकी है। सन् 1967 से 1993 तक 73 से 85 पृष्ठ तक इसका प्रकाशन होता था। 1994 के बाद से वर्तमान में जिनवाणी हिन्दी मासिक पत्रिका 132 पृष्ठों के 5635 ही आजीवन सदस्य थे। 20 वर्ष के कार्यकाल से वर्तमान में 15465 आजीवन सदस्य तथा 141 विदेशों में आजीवन सदस्य, 207 स्तम्भ सदस्य, 119 संरक्षक सदस्य हैं।
अध्यात्म, धर्म, दर्शन, नैतिकता, इतिहास, संस्कृति एवं जीवन-मूल्यों की संवाहक जिनवाणी पत्रिका विगत 73 वर्षों से आपकी सेवा में पहुँच रही है। जनवरी 1943 से समय-समय पर विभिन्न महत्त्व के विषयों पर 17 विशेषामों का प्रकाशन हुआ है। इन विशेषांकों की लोकप्रियता इसी से सिद्ध हो जाती है कि वर्तमान में भी इनके गई विशेषांकों की निरन्तर माँग बनी हुई है।

जिनवाणी का सदस्यता शुल्क निम्न प्रकार है:-

(1) जिनवाणी का देश में 20 वर्षीय सदस्यता शुल्क 1,000/-
(2) विदेशों में शुल्क भारतीय मुद्रा 12,500/-
(3) स्तम्भ सदस्यता 21,000/-
(4) संरक्षण सदस्यता 11,000/-
(5) त्रि वार्षिक सदस्यता रुपये 250/-

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जिनवाणी खाते का विवरण:-

Bank Name STATE BANK OF BIKANER & JAIPUR
A/c Name JINWANI
A/c Number 51026632986
PAN Number AABTS3915P
IFSC Code SBBJ0010843
मुख्य कार्यालय
सम्यग्ज्ञान प्रचारक मण्डल
दुकान नं. 182 के ऊपर,
बापू बाजार, जयपुर-302003 (राजस्थान)
फोन 0141-2575997, 2571163
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सम्पादकीय कार्यालय :
सम्यग्ज्ञान प्रचारक मण्डल
सम्पादकीय कार्यालय
सामायिक स्वाध्याय भवन,
नेहरूपार्क जोधपुर – 342001 (राजस्थान)
फोन : 0291 – 2626279
Email : editorjinwani@gmail.com

केन्द्रीय-कार्यकारिणी सूची

श्री चंचलमल जी बच्छावत

अध्यक्ष

श्री धर्मचन्द जी जैन

कार्याध्यक्ष

श्री विनयचन्द जी डागा

कार्याध्यक्ष

श्री अशोक जी सेठ

कार्याध्यक्ष

श्री वीरेंदर जी जामड़

संयुक्त मंत्री

श्री रितुल जी पटवा

कोषाध्यक्ष

श्री पारसचन्द जी हीरावत

अध्यक्ष

श्री प्रमोद जी महनोत

कार्याध्यक्ष

श्री पदमचन्द जी कोठारी

कार्याध्यक्ष

श्री विनयचन्द जी डागा

मंत्री

श्री कैलाशमल जी दुगड़

अध्यक्ष

श्री सम्पतराज जी चौधरी

कार्याध्यक्ष

श्री विनयचन्द जी डागा

मंत्री

श्री पी. शिखरमल जी सुराणा

अध्यक्ष

श्री सम्पतराज जी चौधरी

कार्याध्यक्ष

श्री विरदराज जी सुराणा

मंत्री

श्री पी. शिखरमल जी सुराणा

अध्यक्ष

श्री नवरतन जी भंसाली

कार्याध्यक्ष

श्री आनन्द जी चौपड़ा

कार्याध्यक्ष

श्री प्रेमचन्द जी जैन

मंत्री

श्रीमती सुशीला जी बोहरा

अध्यक्ष

श्री गौतमराज जी सुराणा

कार्याध्यक्ष

श्री प्रेमचन्द जी जैन

मंत्री

श्री चेतनप्रकाश जी डूंगरवाल

अध्यक्ष

श्री ईश्वरलाल जी ललवाणी

कार्याध्यक्ष

श्री प्रकाशचन्द जी डागा

मंत्री

श्री चेतनप्रकाश जी डूंगरवाल

अध्यक्ष

श्री ईश्वरलाल जी ललवाणी

कार्याध्यक्ष

श्री विमलचन्द जी डागा

मंत्री

श्री डॉ. सम्पतसिंह जी भांडावत

अध्यक्ष

श्री टीकमचन्द जी हीरावत

कार्याध्यक्ष

श्री विमलचन्द जी डागा

मंत्री

श्री डॉ. सम्पतसिंह जी भांडावत

अध्यक्ष

श्री टीकमचन्द जी हीरावत

कार्याध्यक्ष

श्री चेतन्यमल जी ढढ्ढा

मंत्री

श्री देवेन्द्रराज जी मेहता

अध्यक्ष

श्री मोफतराज जी मुणोत

कार्याध्यक्ष

श्री चेतन्यमल जी ढढ्ढा

मंत्री

श्री उमरावमल जी ढढ्ढा

अध्यक्ष

श्री चन्द्रराज जी सिंघवी

मंत्री

श्री सोहननाथ जी मोदी

अध्यक्ष

श्री सज्जननाथ जी मोदी

मंत्री

श्री इन्द्रनाथ जी मोदी

अध्यक्ष

श्री नथमल जी हीरावत

मंत्री

छाया-चित्र

ई-संदेश भेजे

Contact Person

team-3

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TEL: 0141-2575997, 2571163 फैक्स नं. 0141-4068798
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बापू बाजार,
जयपुर-302003 (राजस्थान)
10 am To 05:00 pm