रत्नसंघ

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अखिल भारतीय श्री जैन रत्न युवती मंडल

परम पूज्य श्री कुशलचन्द्रजी म.सा. की पट्टपरम्परा के पाटानुपाट आचार्य तथा वर्तमान आचार्य भगवंत पूज्य श्री हीराचन्द्र जी म.सा., भावी आचार्यप्रवर श्री महेन्द्रमुनि जी म.सा. एवं उनके आज्ञानुवर्ती संत-मुनिराजों व महासतियांजी के प्रति श्रद्धा के लिए प्रेरित करने हेतु युवतियों को जाग्रत करना आवष्यक है।

परम पूज्य आचार्य भगवन 1008 श्री हस्तीमल जी महाराज साहब ने युवतियों को देहरी के दीपक की उपमा प्रदान करते हुए यह स्पष्ट किया है कि जिस प्रकार देहरी पर रखा दीपक घर के भीतर और बाहर दोनों ओर प्रकाश फैलाता है, उसी प्रकार युवती विवाह से पूर्व मायके में और विवाहोपरांत ससुराल में नैतिक आध्यात्मिक, एवं धार्मिक संस्कारों का वपन करती है।

परम पूज्य श्री कुशलचन्द्रजी म.सा. की पट्टपरम्परा के पाटानुपाट आचार्य तथा वर्तमान आचार्य भगवंत पूज्य श्री हीराचन्द्र जी म.सा., भावी आचार्यप्रवर श्री महेन्द्रमुनि जी म.सा. एवं उनके आज्ञानुवर्ती संत-मुनिराजों व महासतियांजी के प्रति श्रद्धा के लिए प्रेरित करने हेतु युवतियों को जाग्रत करना आवष्यक है।

परम पूज्य आचार्य भगवन 1008 श्री हस्तीमल जी महाराज साहब ने युवतियों को देहरी के दीपक की उपमा प्रदान करते हुए यह स्पष्ट किया है कि जिस प्रकार देहरी पर रखा दीपक घर के भीतर और बाहर दोनों ओर प्रकाश फैलाता है, उसी प्रकार युवती विवाह से पूर्व मायके में और विवाहोपरांत ससुराल में नैतिक आध्यात्मिक, एवं धार्मिक संस्कारों का वपन करती है।

युवती का व्यक्तित्व केवल उसके परिवार तक सीमित न रहकर समाज की दिशा और दशा को भी प्रभावित करता है। वह अपने संस्कारों से परिवार की एकता और समाज की मर्यादा को पुष्ट करने वाली प्रमुख धुरी है।

जिन शासन की नारी संस्कारी बने, धर्म के प्रति एवं संघ के प्रति समर्पित रहे तथा सदैव जिन शासन से जुड़ी रहे तथा प्रत्येक युवती अपने तथा अपनों के जीवन में चारित्रिक, आध्यात्मिक और धार्मिक उन्नति का केंद्र बने, इसी पावन भावना और उद्देश्य से अखिल भारतीय श्री जैन रत्न हितेषी श्रावक संघ एवं संघीय संस्थाओं की दिनांक 28 सितंबर 2025 (विक्रम संवत 2082 के अश्वनी मास की षष्ठी तिथि) रविवार को आयोजित संयुक्त आम सभा में ’’अखिल भारतीय श्री जैन रत्न युवती मंडल’’ के गठन की घोषणा की गई।

2.1 आध्यात्मिक एवं धार्मिक उद्देश्य

  1. युवतियों में जिनशासन के मूल आदर्श ज्ञान, दर्शन एवं चारित्र की दृढ़ स्थापना करना तथा उनके माध्यम से धर्माराधना, ज्ञानाराधना एवं तपाराधना के भाव विकसित करना।
  2. युवतियों में आध्यात्मिक चेतना का अभ्युदय कर उनके चारित्रिक, शैक्षणिक, शारीरिक, सांस्कृतिक एवं व्यक्तित्व विकास हेतु निरंतर प्रयास करना।
  3. देव, गुरु, धर्म के प्रति श्रद्धा, भक्ति, विनय एवं आस्था उत्पन्न करना तथा धार्मिक क्रियाओं के वैज्ञानिक, व्यावहारिक एवं क्रियात्मक महत्व को समझाना।
  4. स्वाध्याय, प्रार्थना, सामायिक, रात्रि-भोजन त्याग, पंचपरमेष्ठी स्मरण आदि साधनाओं के माध्यम से धर्म आराधना को जीवन का अंग बनाना।
  5. आगम, जीवनी साहित्य एवं सत्साहित्य के अध्ययन-पाठन की प्रवृत्ति विकसित कर ज्ञान आराधना को प्रोत्साहित करना।
  6. संत-सतियों के सान्निध्य में संयमित वेशभूषा के साथ दर्शन, सेवा एवं तप-साधना के भाव विकसित करना।
  7. युवतियों की आवश्यकता एवं सतियों की वैयावच्च हेतु योग, ध्यान, प्राकृतिक चिकित्सा एवं सात्त्विक जीवन पद्धतियों का प्रशिक्षण प्रदान कर शारीरिक व मानसिक शुद्धि के साथ तप आराधना की प्रेरणा देना एवं इसके लिए शिविरों का आयोजन करना।
  8. ज्ञानार्थ बहनों की सुरक्षा एवं वैराग्य भाव की पुष्टि हेतु पूज्य महासतियों की सेवा-साधना में सहयोग प्रदान करना।
  9. संस्कार निर्माण, धार्मिक वातावरण सुदृढ़ीकरण एवं आध्यात्मिक जागृति को निरंतर गति देना।


2.2 नैतिक एवं चारित्रिक उद्देश्य

  1. युवतियों में सदाचार, शाकाहार, अहिंसा, संयम, सत्य, सरल जीवन एवं नैतिक मूल्यों का प्रचार-प्रसार करना।
  2. सदस्याओं में संगठन, भगिनीभाव, सेवा भावना एवं सामूहिक उत्तरदायित्व का विकास करना।
  3. पारिवारिक जीवन में अनुशासन, सहनशीलता, प्रेम, त्याग, करुणा एवं सामंजस्य की भावना को प्रबल करना।
  4. गृहस्थ जीवन के दायित्वों के साथ धार्मिक संस्कारों की रक्षा, विनय, विवेक, मर्यादा एवं संयम का बोध कराना।
  5. वृद्धजनों, महिलाओं एवं बालक-बालिकाओं की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहकर सेवा को जीवन का अभिन्न अंग बनाना।
  6. भ्रूण हत्या, आत्महत्या, नशाखोरी एवं अन्य सामाजिक कुरीतियों से दूर रहने की प्रेरणा देना तथा व्यसन मुक्ति अभियान को सक्रिय रूप से संचालित करना।
  7. युवतियों में नैतिक व्यक्तित्व, आत्मसंयम, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं नेतृत्व क्षमता का विकास करना।
  8. युवतियों में दान, करुणा, सेवा एवं परोपकार की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करना।


2.3 पारिवारिक एवं संगठनात्मक उद्देश्य

  1. युवतियों को पारिवारिक एवं धार्मिक विकास के अवसर प्रदान करना तथा उन्हें संस्कारित, आत्मनिर्भर एवं जागरूक बनाना।
  2. स्वधर्मी वात्सल्य एवं जरूरतमंद बहनों, बालिकाओं एवं परिवारों को तन-मन-धन से सहयोग प्रदान करना तथा दान प्रवृत्ति को विकसित करना।
  3. प्रशिक्षण शिविर, कार्यशालाएं, संस्कार शिविर एवं व्यक्तित्व विकास शिविरों का नियमित आयोजन करना।
  4. स्वयंसेविका दल का गठन कर चतुर्विध संघ (साधु, साध्वी, श्रावक, श्राविका) की सेवा एवं आध्यात्मिक एवं धार्मिक आयोजनों में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करना।
  5. युवतियों को ड्रेस कोड एवं मर्यादित आचरण अपनाने हेतु प्रेरित करना जिससे संयम, एकता एवं शिष्टाचार का संदेश समाज में जाए।
  6. प्रत्येक घर में धार्मिक वातावरण निर्माण, प्रार्थना, सामायिक, धर्मचर्चा एवं बाल संस्कारों को प्रोत्साहित करना।
  7. गर्भवती बहनों को धार्मिक पाठ, पंचपरमेष्ठी स्मरण, चौदह स्वप्न, तीर्थंकर जीवनियों आदि के श्रवण-पठन हेतु प्रेरित कर गर्भकाल से ही संस्कार निर्माण करना।
  8. शैशवकाल से ही बच्चों में देव-गुरु-धर्म के प्रति श्रद्धा, करुणा, दया एवं अनुशासन के संस्कार डालना।
  9. युवतियों में संयम, स्वाध्याय, साधना एवं धार्मिक सेवा के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना।
  10. संघ की विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता कर संगठन को सशक्त बनाना तथा रत्न संघ की शाखाओं में समन्वय स्थापित करना।
  11. महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, सेवा एवं संस्कार निर्माण से संबंधित कार्यक्रमों का संचालन करना।
  12. चातुर्मास, साधु-साध्वी सेवा, प्रवचन, धर्म प्रभावना आदि में सहयोग प्रदान करना तथा संघीय योजनाओं की सफलता हेतु सतत प्रयास करना।

अखिल भारतीय श्री जैन रत्न श्राविका मण्डल, जोधपुर

सामायिक स्वाध्याय भवन, प्लॉट नं.-2,

नेहरू पार्क- जोधपुर ( राज.) 342003

फोन नं.- 0291-2636763

ई-मेल - yuvatimandal25@gmail.com 

 

केन्द्रीय - पदाधिकारी

परामर्शदाता

श्रीमती संगीता जी लोढ़ा - जयपुर

परामर्शदाता

श्रीमती शिखाजी जैन - जयपुर

अध्यक्ष

श्रीमती विजेताजी लोढ़ा - जयपुर

कार्याध्यक्ष

मनीषा जी गुन्देचा - जोधपुर

महासचिव

डॉ. सेहलजी जैन - जयपुर

कोषाध्यक्ष

श्रीमती खुशबू जी डागा (सी.ए.) - जोधपुर

DESG. HINDINAMESMob. No.City
परामर्शदाताश्रीमती पूर्णिमाजी लोढ़ा (Purnima Ji Lodha)9829019396Jaipur (Raj.)
परामर्शदाताश्रीमती मंजूजी भण्डारी (Manju Ji Bhandari)9342677066Bangalore (Kar.)
अध्यक्षश्रीमती अलकाजी दुधेड़िया (Alka Ji Dudhediya)9828156250Ajmer (Raj.)
कार्याध्यक्षश्रीमती संगीताजी बोहरा (Sangeetaji Bohra)9444372714Chennai (Tamilnadu)
कार्याध्यक्षश्रीमती मोनिकाजी डांगी (Monika Ji Dangi)9829480586Ajmer (Raj.)
उपाध्यक्षश्रीमती वैजयन्तीजी मेहता (Vejyanti Ji Mehta)9341552565Bangalore (Kar.)
उपाध्यक्षश्रीमती रजनीजी जैन (Rajni Ji Jain)9460230960Sawaimadhopur (Raj.)
उपाध्यक्षश्रीमती विमलाजी भण्डारी (Vimla Ji Bhandari)9830492194Kolkata (W.B.)
उपाध्यक्षश्रीमती नेहाजी गांधी (Neha Ji Gandhi)9879250322Ahmedabad (Guj.)
महासचिवश्रीमती श्वेताजी कर्नावट (Shweta Ji Karnawat)9929319999Jodhpur (Raj.)
कोषाध्यक्षश्रीमती बिन्दूजी भाण्डावत (Binduji Bhandawat)9983331482Jodhpur (Raj.)
सचिवश्रीमती विनीताजी कांकरिया (Vinita Ji Kankariya)9414031379Jodhpur (Raj.)
सह सचिवश्रीमती ममताजी भण्डारी (Mamta Ji Bhandari)7014184039Beawar (Dist. Ajmer) (Raj.)
क्षेत्रीय प्रधान मारवाड़ सम्भागश्रीमती ममताजी भण्डारी (Mamta Ji Bhandari)7976749544Nagaur (Raj.)
क्षेत्रीय प्रधान
मध्य राजस्थान
सम्भाग
श्रीमती विजेताजी सोनी (Vijeta Ji Soni)9829072581
8209162932
Madangunj
Kishangarh
Dist. Ajmer) Raj.
क्षेत्रीय प्रधान
पल्लीवाल संभाग
श्रीमती रेखाजी जैन (Rekha Ji jain
9460223236Sawaimadhopur
(Raj.)
क्षेत्रीय प्रधान
पोरवाल संभाग
श्रीमती अर्चनाजी जैन (Archna Ji Jain)9829210769Mandawar
(Dist. Dausa) Raj.
क्षेत्रीय प्रधान
गुजरात संभाग
श्रीमती अनुराधाजी मेहता (Anuradha Ji Mehta)9819809608Ahmedabad (Guj.)
क्षेत्रीय प्रधान
कर्नाटक संभाग
श्रीमती माधवीजी सुखानी (Madhvi Ji Sukhani)90084 34789Raichur (Kan.)
क्षेत्रीय प्रधान पूर्वी भारत संभागश्रीमती मंजूजी भण्डारी (Manju Ji Bhandari)9831254044Kolkata (W.B.)
क्षेत्रीय प्रधान मध्यप्रदेश संभागश्रीमती अंजूजी चोरड़िया (Anju Ji Chordia)9407119091Indore (M.P.)
क्षेत्रीय प्रधान
तमिलनाडु संभाग
श्रीमती जयन्तीजी बाघमार (Jayanti Ji Baghmar)9841787845Chennai (T.N.)
क्षेत्रीय प्रधान महाराष्ट्र संभाग संयोजकश्रीमती धनवन्तरीजी चौधरी (Dhanwantri Ji Chaudhary)9422728035Dhulia (Mah.)

छाया-चित्र

आगामी कार्यक्रम