-- नन्दी सूत्र - संघ स्तुति --
1 नगर, 2. रथ, 3. चक्र, 4. पद्म, 5. चन्द्र, 6. सूर्य, 7. समुद्र और 8. मेरु की जिसे उपमा दी जाती है, ऐसे ज्ञान दर्शन चारित्र तप संपन्न गुणाकार-गुणसमुद्र संघ को मैं सतत स्तुति करता हूँ
जो उवमिज्जइ सययं, तं संघगुणायरं वंदे॥
नगर-रह-चक्क-पउमे, चन्दे सूरे समुद्द-मेरुम्मि। 

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Data collection

अखिल भारतीय श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ के द्धारा अनुमोदित एवं अखिल भारतीय श्री जैन रत्न युवक परिषद् द्धारा क्रियान्वित रत्नसंघीय परिवारो का सूचना संग्रहण कार्यक्रम का उद्देश्य रत्न संघ के सभी सदस्यों का विवरण संकलित कर संघ एवं उनकी सहयोगी संस्थाओं के उत्थान के लिये उनका उपयोग करना एवं संघ की सभी योजनाओं, कार्यक्रमों की जानकारी संघ के प्रत्येक सदस्य तक पहुँचाना हैं ।
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पच्चक्खाण मार्गदर्शिका

नवकारसी का पाठ
उग्गए सूरे णमुक्कारसहियं पच्चक्खामि चउव्विहं पि आहारं असणं, पाणं, खाइमं, साइमं, अण्णत्थणाभोेगेणं, सहसागारेणं वोसिरामि।

पोरसी का प्रत्याख्यान
उग्गए सूरे पोरिसियं पच्चक्खामि चउव्विहंपि आहारं असणं पाणं खाइमं साइमं अण्णत्थणाभोेगेणं सहसागारेणं पच्छन्नकालेणं दिसामोहेणं साहुवयणेणं सव्वसमाहिवत्तियागारेणं वोसिरामि।।
पच्चक्खाण पारने का पाठ
.........................पच्चक्खाणं कयं तं पच्चक्खाणं सम्मंकाएणं, न फासियं, न पालियं, न तीरियं, न किट्टियं, न सोहियं, न आराहियं, आणाए अणुपालियं न भवइ तस्स मिच्छा मि दुक्कडं।

नवकारसी

पोरसी

डेढ़ पोरसी

दो पोरसी

sunrise

सूर्योदय

07:25 AM IST
sunset

सूर्यास्त

05:57 PM IST

नोट- रिक्त स्थान में जो पच्चक्खाण किया हो उसका नाम बोलें जैसे णमुक्कारसहियं, पोरिसियं, एगासणं आदि।

स्थानकवासी परम्परा और उसकी मौलिक मान्यताएँ

भगवान महावीर की विशुद्ध परम्परा निग्र्रन्थ, श्रमण, सुविहित आदि विविध रूपों का पार करती हुई समय के प्रभाव से स्थानकवासी के नाम से पुकारी जाने लगी। ‘स्थानक’ शब्द का अर्थ बहुतव्यापक…….

जैन धर्म में रत्न संघ एवं परम्परा का परिचय

जैन धर्म अनादि है, सनातन है, शास्वत है। शास्त्रीत मान्यानतानुसार कालचक्रम में उत्सर्पिणी और अवसर्पिणी दो कालचक्र हैं, जिन्हें वृद्धिमान और हीयमान नाम से भी कह सकते हैं।……..

पाँच अभिगम

अभिगम अर्थात् भगवान् के समवसरण में या साधु-साध्वी के उपाश्रय (स्थानक) में जाते समय पालने योग्य नियम। ये अभिगम पाँच है….

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रत्न संघ

TEL: 0291 2636763
Email: sanghwebsite@gmail.com

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अखिल भारतीय श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ
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घोड़ों का चौक
जोधपुर-342001 राज.
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