रत्नसंघ

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सुपात्रदान विवेक-32 (Supatradaan Vivek-32)

साधु महाव्रतों से संयम रुपी यात्रा का निर्बाध पालन करने वाला होता है। पाँच महाव्रतों में चतुर्थ महाव्रत ब्रह्मचर्य का पालन है। उस ब्रह्मचर्य को शास्त्रों में सर्वश्रेष्ठ तप बताया गया है। उस ब्रह्मचर्य रुपी अनमोल रत्न की सुरक्षा हेतु नववाड बताई गई है। नववाड के अन्तर्गत ही रुपक रुप में बताया गया है कि […]