15. भगवान धर्मनाथ जी

पूर्वभव नाम: सिंहरथ
14. भगवान अनन्तनाथ जी

पूर्वभव नाम: माहिन्द्र
13. भगवान विमलनाथ जी

पूर्वभव नाम: सुन्दर
12. भगवान वासूपुज्य जी

पूर्वभव नाम: इन्द्रदत्त
11. भगवान श्रेयांसनाथ जी

पूर्वभव नाम: दिन्न (दित)
10. भगवान शीतलनाथ जी

पूर्वभव नाम: लष्टबाहु
9. भगवान सुविधिनाथ जी

पूर्वभव नाम: युगटबाहु
8. भगवान चन्द्रप्रभु जी

पूर्वभव नाम: दीर्घबाहु
7. भगवान सुपार्श्वनाथ जी

पूर्वभव नाम: सुंदरबाहु
सुपात्रदान विवेक-32 (Supatradaan Vivek-32)

साधु महाव्रतों से संयम रुपी यात्रा का निर्बाध पालन करने वाला होता है। पाँच महाव्रतों में चतुर्थ महाव्रत ब्रह्मचर्य का पालन है। उस ब्रह्मचर्य को शास्त्रों में सर्वश्रेष्ठ तप बताया गया है। उस ब्रह्मचर्य रुपी अनमोल रत्न की सुरक्षा हेतु नववाड बताई गई है। नववाड के अन्तर्गत ही रुपक रुप में बताया गया है कि […]